ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल की मुख्य विशेषताएँ

ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल की मुख्य विशेषताएँ  ब्रिटिश मन्त्रिमण्डल प्रीवी काउन्सिल का सक्रिय भाग है। मन्त्रिमण्डल ही देश की सर्वोच्चता कार्यकारिणी एवं प्रशासकीय अंग है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में मन्त्रिमण्डल का अपना महत्त्वपूर्ण स्थान है। मन्त्रिमण्डल की सत्ता से प्रशासनिक प्रणाली का संचालन, संगठन का नियोजन किया जाता है। इंग्लैण्ड में वास्तविक तथा व्यावहारिक कार्यपालिका मन्त्रिमण्डल ही है। […]

चोल कालीन कला पर एक समीक्षात्मक टिप्पणी

चोल कालीन कला पर एक समीक्षात्मक टिप्पणी  चोल युगीन कला-दक्षिण भारतीय कला के अन्तर्गत चोलयुगीन कला अपने पूर्व युग की कला से भी बहुतआगे बढ़ गई थी। चोल वंशी महान् शासकों की विजय पताका दक्षिण भारत के एक बड़े भू-भाग में ही नहीं भारतीय सागर को द्वीपों पर भी फहरा रही थी। जहाँ तक चोलकालीन […]

वैदिक संस्कृति की मूलभूत विशेषताए

वैदिक संस्कृति की मूलभूत विशेषताए  ऋग्वेद या पूर्व वैदिक संस्कृति की विशेषताएं-ऋग्वैदिक काल से आशय उस समाज से है जबकि आर्य पंजाब तथा गंगा घाटी के उत्तरी भाग में फैले थे। ऋग्वेद एक उस समय का ऐसा ग्रन्थ है जिससे पूर्व वैदिक कालीन आर्यों की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक स्थिति का विवरण मिलता है। जिस […]

उत्तर वैदिक कालीन का सामाजिक आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक जीवन

उत्तर वैदिक कालीन का सामाजिक आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक जीवन  उत्तर वैदिक सभ्यता- वैदिक युग के अन्तर्गत उत्तर वैदिक सभ्यता अर्थात् वैदिक काल से हमारा आशय उस काल से है जिसमें तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद-ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक तथा उपनिषदों की रचना हुई। इसमें आर्य सभ्यता का विकास एवं विस्तार हुआ। वह पंजाब से आगे शेष […]

भारतीय संस्कृति विभिन्न के स्रोतों पर टिप्पणी

भारतीय संस्कृति के विभिन्न स्रोतों पर टिप्पणी  किसी भी देश के समग्र अध्ययन के लिए उस देश से सम्बन्धित साक्ष्य सामग्री अथवा स्रोत की आवश्यकता होती है। ये स्रोत मूलत: दो प्रकार के होते हैं-प्रथम साहित्यिक स्रोत और द्वितीय पुरातात्त्विक स्रोत। जहाँ तक भारतीय संस्कृति के अध्ययन का प्रश्न है, इसके भी कुछ महत्त्वपूर्ण स्रोत अथवा […]

भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत संस्कृति की परिभाषा

भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत संस्कृति की परिभाषा  संस्कृति का तात्पर्य (अर्थ) संस्कृति का आशय है किसी भी देश अथवा राष्ट्र की वह समस्त गतिविधियाँ जिसके अन्तर्गत उस देश का समग्र मानवीय विकास होता है। संस्कृति शब्द देखने में छोटा लगता है, लेकिन यदि हम इसका विस्तृत अध्ययन करें तो संस्कृति से कोई भी चीज अछूती नहीं […]

अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति का सार है

“अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति का सार है।”  हमारे देश भारत में सभी धर्मों के लोग निवास करते हैं ये लोग बहु भाषा-भाषी है। इनकी इन विषमताओं को देखकर कोई भी बाहरी व्यक्ति यह समझ सकता है अथवा ठसे सन्देह हो सकता है कि भारत एक देश न होकर छोटे छोटे खण्डों का विशाल जन […]

1930 के दशक में हुई विश्व आर्थिक मंदी के प्रभाव से निपटने में संयुक्त राज्य अमेरिका का न्यूडील कार्यक्रम

 1930 के दशक में हुई विश्व आर्थिक मंदी के प्रभाव से निपटने में संयुक्त राज्य अमेरिका का न्यूडील कार्यक्रम   अमरीकी न्यू डील नीति प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् 1930 के दशक में आर्थिक मंदी ने अपना भयानक रूप ले लिया। जो अमेरिका के राष्ट्रपति एफ० डी० रुजवेल्ट के सामने एक गम्भीर चुनौती थी। इस संकट से […]

1930 के दशक में हुई विश्व आर्थिक मंदी के प्रभाव से निपटने में संयुक्त राज्य अमेरिका का न्यूडील कार्यक्रम

 1930 के दशक में हुई विश्व आर्थिक मंदी के प्रभाव से निपटने में संयुक्त राज्य अमेरिका का न्यूडील कार्यक्रम   अमरीकी न्यू डील नीति प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् 1930 के दशक में आर्थिक मंदी ने अपना भयानक रूप ले लिया। जो अमेरिका के राष्ट्रपति एफ० डी० रुजवेल्ट के सामने एक गम्भीर चुनौती थी। इस संकट से […]

तुर्की के आधुनिकीकरण एवं इसमें मुस्तफा कमाल पाशा के योगदान

तुर्की के आधुनिकीकरण एवं इसमें मुस्तफा कमाल पाशा के योगदान मुस्तफा कमाल पाशा एक दूरदर्शी नेता था जिसने समझ लिया कि तुर्की (टर्की) का पुनरुत्थान तभी संभव है जब वह आधुनिकीकरण की प्रवृत्तियों को आत्मसात करे, देश के आर्थिक ढाँचे का पुनर्गठन करे और तुर्की के राजनीतिक जीवन को नई दिशा और एक नई गति […]