सुमेरिया सभ्यता की धार्मिक स्थिति

सुमेरिया सभ्यता की धार्मिक स्थिति  धर्म और अनुष्ठान –सुमेर के प्राचीन निवासियों के दैनिक जीवन में आर्थिक कार्य-कलापों के अतिरिक्त धर्म का भी विशेष महत्व था बहुदेववादी सुमेर और अक्काद में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती थीं। किन्तु प्रत्येक नगर में एक प्रधान एवं विशिषट देवता था जिसे नगर का संरक्षक माना जाता था। […]

सुमेरियन वास्तुकला अथवा जिगुरत क्या है

 सुमेरियन वास्तुकला अथवा जिगुरत क्या है  वास्तुकला –सुमेरियन सभ्यता में लोग वास्तु कला से भी परिचित थे। यहाँ नरकलों को गाड़कर विभिन्न प्रकार की झोपड़ियां बनायी जाती थी। दीवारों के शीर्ष भाग गुम्बद के आकार का बना होता था। निरपुर से 5 हजार ई.पू. की मेहराबदार नाली मिली है। समाधियों और दरवाजों में मेहराब का […]

सुमेरियन सभ्यता के लेखन कला और साहित्य

 सुमेरियन सभ्यता के लेखन कला और साहित्य  लेखन कला विश्व सभ्यता के सम्पूर्ण इतिहास में सुमेर के निवासी, लेखन कला का आविष्कार करने वाले पहले लोग थे। मानव की स्मृति प्रमशील है अतः विवाद उत्पन्न होने पर स्थायी साक्षी की आवश्यकता पड़ी। धीरे-धीरे इन लोगों ने अनुभव किया कि मात्र किसी के कह देने से […]

दूसरे असीरियन साम्राज्य की स्थापना

दूसरे असीरियन साम्राज्य की स्थापना  असीरिया के प्रारम्भिक इतिहास के विषय में जानकारों को अभाव है। ऐसा माना जाता है कि लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व असिरियनों ने ‘असुर नगर को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र बनाया अब असिरियनों में अपने साम्राज्य विस्तार की ओर ध्यान दिया जिसमें अनेक शासकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तिगलथ […]

असीरियन सभ्यता के आर्थिक संगठन पर प्रकाश

असीरियन सभ्यता के आर्थिक संगठन पर प्रकाश  आर्थिक संगठन- आर्थिक दृष्टि से असीरियनों को भी लगभग वही सुविधाएँ मिली थीं जो सुमेरियनों तथा बेबिलोनियनों को। दजला के दोनों ओर स्थित उर्वर मैदान कृषि के लिए उपयुक्त थे। यहाँ गेहूँ, जौ, बाजरा तथा तिल की खेती मुख्य रूप से की जाती थी। बेबिलोनियनों की भाँति बाँध […]

मुगलकालीन भारत में महिलाओं की दशा

मुगलकालीन भारत में महिलाओं की दशा मुगलकालीन भारत एवं आज के भारत में बहुत कुछ साम्यता थी। यह पूर्ण सत्य है कि उस समय न तो रेलें थी एवं न ही पक्की सड़के। इसके अतिरिक्त और कोई बहुत बड़ी भिन्नता नहीं थीं। देहात बहुत अधिक थे एवं वन उस समय के बहुत घने थे। उस समय […]

मुगल काल में फारसी साहित्य के विकास

मुगल काल में फारसी साहित्य के विकास  मध्यकाल में मुगल सम्राट साहित्य के संरक्षक थे और इसकी विविध शाखाओं के विकास को उन्होंने खूब प्रेरणा दी। सम्राट ही नहीं हुमायूँ की माता से लेकर औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा तक अन्तपुर की स्त्रियां भी कला और साहित्य की संरक्षिकाएँ थीं। वे सुन्दर वस्तुओं, उद्यानों, चित्रकारी के […]

मुगलों के अधीन चित्रकला के विकास उनकी विशेषता

मुगलों के अधीन चित्रकला के विकास उनकी विशेषता मुगलकालीन शासक चित्रकला का हृदय से स्वागत करते थे। यद्यपि कुरान में चित्रकला का निषेध किया गया है। 13वीं शताब्दी में चित्रकला का प्रारम्भ मंगोल विजेताओं ने फारस में किया था। यह चीनी कला का प्रान्तीय रूप था और इस पर भारतीय, बौद्ध, ईरानी, वैक्ट्रियाई और मंगोलियन […]

खिलजी एवं तुगलक शासकों के अधीन वास्तुकला के विकास

खिलजी एवं तुगलक शासकों के अधीन वास्तुकला के विकास  सल्तनत काल (1206-1526 ई०) में कला के क्षेत्र में वास्तुकला (स्थापत्य) का सर्वाधिक विकास हुआ। जिस समय तुकों ने भारत पर आक्रमण किया, उस समय मध्य एशिया में विभिन्न जातियाँ वास्तुकला की एक विशिष्ट शैली का विकास कर चुकी थीं। इस शैली का विकास स्थानीय कला शैलियों, […]

भारत में सूफीवाद प्रभाव और भूमिका

भारत में सूफीवाद प्रभाव और भूमिका सूफी मत की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वानों में मृतभेद है। प्रसिद्ध इतिहासकार यूसुफ हुसैन का अभिमान है कि इसका जन्म इस्लाम से हुआ और इसमें बाहर के विचारों और रिवाजों का कोई प्रभाव नहीं हुआ। डॉ. आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव का विचार है कि सूफीवाद पर हिन्दू विचारों और रिवाजों का अत्यधिक […]