साहित्य के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान

 साहित्य के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान 

बेबिलोनियन कीलाक्षर लिपि में लिखित साहित्य एक प्रकार से सुमेरियन साहित्य ही था पर इसके संकलन तथा संग्रथन में उन्होंने अपने परिवेश के अनुकूल उचित परिवर्तन कर मौलिकता लायी। इनकी साहित्यिक कृतियों के रूप में सर्वप्रथम गिल्गीमिश महाकाव्य (Gilgamesh Epic) का उल्लेख किया जा सकता है। इलियड (परसपक) की भांति इसमें भी अनेक कथाएँ एक दुसरे से सम्बद्ध हैं। गिल्गीमिश एरेक का एक पौराणिक शासक था। महाकाव्य में उसका व्यक्तित्व अत्यन्त शक्तिशाली एरेक का एक पौराणिक शासक था। महाकाव्य में उसका व्यक्तित्व अत्यन्त शक्तिशाली एवं कान्तिमान वीर पुरूष के रूप में वर्णित है। यद्यपि इस महाकाव्य की मूल कथा सुमेरियन आख्यान से ग्रहण की गई है लेकिन बेबिलोनियन रूपान्तरण में इसे वास्तविक महाकाव्य का रूप देकर अधिक सुशाहा एवं सुरुचिपूर्ण बनाया गया।

 यहाँ मूलकथा में यथावश्यक परिवर्तन कर इसे बारह अध्यायों में विभाजित किया गया। इस आख्यान के कुछ अंश बोगाज-कोई से भी मिले हैं, अतएवं लगता है कि इसका अनुवाद हित्ती एवं हरियन भाषाओं में भी किया गया था। एस. एन. क्रेमर के अनुसार गिल्गमिश महाकाव्य की आधारभूत कितनी ही सुमेरियन कथाएँ अक्कादी रूप में विद्यमान है। बारह अध्यायों में विभक्त होने के कारण बहुत से विद्वान् गिल्गीमिश आख्यान को एक सौर-आख्यान (Solar Myth) स्वीकार करते हैं । लेकिन किंग महोदय इससे सहमत नहीं है। आपके अनुसार गिल्गेमिश महाकाव्य का बारह अध्यायों में विभाजन उस समय किया गया जब इसने अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त कर ली थी। ऐसी स्थिति में इसे सौरआख्यान मानने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। जो भी हो द्वितीय सहस्राब्दी ई. में मेसोपाटामिया एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में यह महाकाव्य विख्यात हो गया था। 

गिलौमिश महाकाव्य के बाद द्वितीय स्थान पर जगत् उत्पत्ति आख्यान’ (The Epic of the Creation of the World) का उल्लेख किया जा सकता है। इसे ‘एनुमा-एलिश’ (Enuma elish) नाम से भी सम्बोधित किया गया है। जगत की उत्पत्ति कैसे हुई तथा देव समूह द्वारा इसका संचालन कैसे किया जाता है, इस आख्यान का वर्ण्य विषय है। इसमें विश्व का संचालन करने वाले देवताओं में मर्द का स्थान श्रेष्ठ बताया गया है। इस आख्यान की लगभग एक सहस्र पंक्तियाँ सात पाटियों पर उत्कीर्ण प्राप्त हुई हैं। नववर्षोत्सव के उपलक्ष्य में नाटक के रूप में इसका अभिनय किया जाता था जिसमें बेंबिलोनियन शासक सक्तिगत रूप से भाग लेते थे। इस कारण इसकी लोकप्रियता बढ़ गई थी।

एनुमा-एलिश के अतिरिक्त यहाँ कुछ अन्य कथाएँ भी प्रचलित थीं, जिसमें मनुष्य एवं देवताओं की उत्पत्ति का वर्णन किया गया था। मनुष्य की उत्पत्ति सम्बन्धित कथा में मनुष्य की उत्पत्ति एक देवता के रक्त से तथा मानवीय भोगों की उत्पत्ति एक देवी द्वारा बनायीं गयी है। इसका पठन-पाठन संतानोत्पत्ति के अवसर पर किया जाता था। देवताओं की उत्पत्ति-सम्बन्धित आख्यान में आठ देवताओं की उत्पत्ति का वर्णन है। एक अन्य काव्य में नर्गल के पाताल लोक के राजा तथा एरिश किगल के पति बनने का उल्लेख मिलता है। अन्य प्रसिद्ध बेबिलोनियन आख्यानों में भाग्य-लेख’ (Tables of destiny), ‘एटन गड़ेरिये की कथा’ (Myth of Elanc) एवं ‘आदप मछुए की कथा’ (The Story of Adpa) का उल्लेख किया जा सकता है। 

भाग्य लेख के अनुसार मनुष्यों एवं देवताओं के भाग्य कुछ तख्तियों पर, जो तिपायत के अधिकार में थीं उत्कीर्ण थे मार्दुक ने उन्हें प्राप्त कर लिया था लेकिन एक दैत्य ने उन्हें चुरा लिया। अन्त में शमश ने उन्हें दैतय से मुक्त कराया। एटन की कधा में एटन का चील की पीठ पर आरूढ़ होकर आकाश-गमन एवं वहाँ से पृथ्वी पर गिरने का वर्णन किया गया है। आदप मछुए की कथा’ में आदप को अत्यन्त क्रोधी बताया गया है। एक बार दक्षिणी वायु देवी ने उसकी नौका उलट दी। उसने क्रध होकर देवी का पर छिन्न-भिन्न कर दिया। परिणामतः उसे आकाश देव के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। क्रोध शान्त होने पर देवता ने उसे जल तथा रोटी दी। इसे ग्रहण कर वह अमरत्व प्राप्त कर सकता था लेकिन उसे अस्वीकार कर उसने यह अवसर खो दिया। 

वैविलोनियन साहित्य में कथा-साहित्य के अतिरिक्त देव स्तोत्र. पूजा-गीत एवं आभिचारिक मंत्र भी लिखे गये। इनमें सर्वाधिक संख्या देव-स्तोत्रों की थी। क्षमा-प्रार्थना से सम्बन्धित इनके कुछ गीत अत्यन्त मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी हैं। बेबिलोनियन लौकिक साहित्य अधिक समृद्ध नहीं माना जा सकता। आधिकारिक रूप से उपनिबद्ध इतिवृत्तों में शासकों की विजयों का वर्णन किया गया है और मन्दिरों के विस्तृत विवरण तथा प्रत्येक नगर के जीवन की प्रमुख घटनाएँ अंकित हैं। लेकिन ये ऐतिहासिक महत्व के होते हुए भी साहित्यिक दृष्टि से परवर्ती हिन्ती एवं असीरियन शासकीय लेखों के सदृश महत्वपूर्ण नहीं है।

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