दूसरे असीरियन साम्राज्य की स्थापना

दूसरे असीरियन साम्राज्य की स्थापना 

असीरिया के प्रारम्भिक इतिहास के विषय में जानकारों को अभाव है। ऐसा माना जाता है कि लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व असिरियनों ने ‘असुर नगर को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र बनाया अब असिरियनों में अपने साम्राज्य विस्तार की ओर ध्यान दिया जिसमें अनेक शासकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तिगलथ पिलेंसर के पश्चात् असीरिया में एरेमियनों का उत्कर्ष प्रारम्भ हुआ जिन्हें भाषा के आधार पर अरब निवासी माना जाता है। तिगलथ पिलेसर के उत्तराधिकारी इनके प्रवाह को न रोक सके जिससे असीरिया का साम्राज्य विस्तार अवरूद्ध हो गया। इस प्रकार 200 वर्षों तक यहाँ के इतिहास में अंधकार का युग बना रहा।

असीरियन साम्राज्य का वास्तविक विस्तार अशुर नासिरपाल के समय (883 ई.पू.) से प्रारम्भ हुआ। उसने दूसरे असीरियाई साम्राज्य की स्थापना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अशुर नासिरपाल :- इसका शासन का 883-858 ई.पू. तक था। अशुर नासिरपाल के समय में असीरिया पुनः सैनिक शक्ति बन गया था। वह एक शक्तिशाली शासक था। उसने साम्राज्य विस्तार की लालसा से दक्षिणी अमीनिया एवं साइलिसिया यर अधिकार किया और फरात नदी पारकर सीरिया होता हुआ वह भूमध्यसागर के तट पर स्थित कीनिशियन नगर तक पहुँच गया| अशुर नासिरपाल ने ही सर्वप्रथम सेना में अश्वों का प्रयोग किया था। उसने विजित प्रदेशों में अपनी क्रूरता के बल पर अत्यधिक आतंक फैलाया। नगरों का ध्वस्तीकरण, नागरिकों की निर्मम हत्या व जिन्दा जलाना, बन्दी लोगों को असहनीय यातनाएँ देना आदि उसकी क्रूरता के प्रमुख अंग थे। 

शाल मेनेसर तृतीय :– इसका शासन काल 858-824 ई.पू. तक था। अशुर नासिरपाल के पश्चात् उसका पुत्र शाल मेनेसर तृतीय सिंहासनारूढ़ हुआ। वह एक महान विजेता था। अपने शासनकाल के 35 वर्षों में से 31 वर्षों तक वह युद्ध में व्यस्त रहा। उसने बेबीलोन को पराजित किया और वहाँ के शासक द्वारा वार्षिक कर देने पर शासन का भार ठसे सपि दिया। शाल मेनेसर तृतीय को टौरस और सिलसिया पर भी अधिकार करने में सफलता मिली। इन विजयों के फलस्वरूप असीरिया पश्चिमी एशिया की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभर कर सामने आया।

तिगलथ पिलेसर तृतीय :- इसका शासन काल 745-727 ई.पू. तक था। तिगलथ पिलेसर तृतीय के राज्यकाल में असीरिया ने अपने खोये हुए वैभव को पुनः प्राप्त कर लिया। वह मूल रूप से असीरियन सेनापति था। उसने दक्षिण में एरेमियन तथा पुकुद जाति को पराजित किया तथा उतुं पर आक्रमण कर दिया। उरतु का शासक सुर्दर तृतीय पराजित हुआ। पूर्व में मीडों व देगावेन्द के भू-भागों पर उसने अपना आधिपत्य स्थापित किया। इसी प्रकार भूमध्यसागर की ओर टापर, सिडन, एमोन, मोब तथा एडोम पर भी उसने अधिकार जमाया। इन विजयों के फलस्वरूप असीरिया साम्राज्य का विस्तार दक्षिण में फारस की खाड़ी, उत्तर में अमीनिया तथा पश्चिम में भूमध्यसागर तक हो गया। उसकी मृत्यु के बाद उसका सेनापति सारगोन द्वितीय शासनारूढ़ हुआ। 

सारगोन द्वितीय :- सारगोन द्वितीय तिगलय पिलेसर तृतीय का सेनापति था। इसका शासन काल 722 से 705 ई. पूर्व तक था। तिगलथ पिलेसर की मृत्यु के पश्चात् सारगोन ने राज्य पर अधिकार कर लिया और स्वयं शासक बन बैठा वह एक महत्वाकांक्षी शासक था जिसने कई युद्धों में विजय प्राप्त की। उसने इजरायल पर अधिकार कर उसे अपने साम्राज्य का एक प्रान्त बना दिया। 714 ई.पू. में उसने उरतु के शासक रूस प्रथम को पराजित किया और फिर एशिया माइनर के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित गुरकी राज्य पर आक्रमण कर वहाँ भी अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। तत्पश्चात् सारंगोन द्वितीय ने उत्तर-पूर्व में मीडिया के मन्नाई प्रदेश एवं उत्तर- पश्चिम के का्शेमिश नगरों के विद्रोह का दमन किया। इसके बाद उसने बेबीलोन की ओर ध्यान दिया और उस पर भी विजय प्राप्त की। इन विजयों के परिणामस्वरूप असीरियन साम्राज्य सिलिसिया से फारस की खाड़ी तक विस्तृत हो गया।

सेन्नाचेरिव :-सारगोन द्वितीय के बाद उसका पुत्र सेन्नाचेरिवअसीरिया की गद्दी पर बैठा। इसने 705 ई.पू. से 681 ई.पू. तक शासन किया। वह भी एक महान योद्धा तथा कुशल प्रशासक था। सेत्राचेरिय के समय में भी बेबीलोनिया, कैल्डियन, एलमाइटों तथा एरेमियनों ने विद्रोह का दमन कर दिया तथा मिल और बेबीलोनिया के विद्रोहों को भी कुशलतापूर्वक दवा दिया।

एसारहद्दन :- इसका शासन काल 681-669 ई०पू० तक था। वह बड़ा पराक्रमी और प्रजावत्सल सपाट था। उसने अपने पिता द्वारा ध्वस्त बैबीलोनिया का पुनर्निर्माण करवाया और वहां के निवासियों को पुनः वहाँ बसने के लिए स्वतंत्रता दे दी। उसने मिस तक अपने साम्राज्य का विस्तार कर मिल की ‘सम्राट नामक उपाधि धारण की। इस प्रकार उसका साम्राज्य भूमध्यसागर से फारस की खाड़ी तथा अरारत से मित्र तक फैल गया। 

अशुर बनिपाल :-  अशुर बनिपाल असीरिया का अन्तिम प्रतापी और प्रसिद्ध शासक हुआ। उसके शासनकाल में असीरिया की शान-शौकत और समृद्धि अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुकी थी। अशुर बनिपाल का साम्राज्य बेबीलोन, मीडिया, फिनीशिया, सुमेरिया तथा एलम तक विस्तृत था। उसने मिस्र को स्वतंत्र होने दिया तथा स्वाधीनता प्राप्ति के बाद मिस्र के शासक सामेटिकस को अपना मित्र बना लिया 626 ई. पू.में उसकी मृत्यू हो गयी।

अशुर बनिपाल की मृत्योपरान्त असीरियन साम्राज्य का विघटन प्रारम्भ हो गया मीड जैसे राज्य अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने लगे। यद्यपि अशुर बनिपाल के उत्तराधिकारियों ने असीरियन साम्राज्य के अवशिष्ट अंश को बचाये रखने का बहुत प्रयत्न किया, परन्तु वे असफल रहे और अन्त में 606 ई.पू. में असीरियन साम्राज्य का स्वतंत्र अस्तित्व का अन्त हो गया।

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