प्राचीन यूनान के कृषि, उद्योग व अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

प्राचीन यूनान के कृषि, उद्योग व अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार  1. कृषि व उद्योग :- होमर युग में समाज के आर्थिक जीवन का आधार कृषि थी। कृषि भूमि राजा के अधीन होती थी वह स्वेच्छा से इसे केवल जोतने बोने के लिए किसी को देता था पर उस व्यक्ति को खरीदने तथा बेचने का अधिकार नहीं होता […]

यूनान के प्रमुख दार्शनिकों का वर्णन

यूनान के प्रमुख दार्शनिकों का वर्णन   धर्म :-पेरिक्लीज युग के एथेन्स की धार्मिक व्यवस्था एक प्रकार से परम्परागत पूर्व प्रचलित धार्मिक व्यवस्था ही थी। जन-जीविन पर धर्म का पूर्ण प्रभाव था। यूनानी अपने प्रत्येक कार्य का प्रारम्भ देव-वन्दना से करते थे। उनके देवता, प्राकृतिक शक्तियाँ तथा मानवीय प्रवृतियाँ तथा काम-क्रोध, लोभ, घृणा आदि के प्रतीक […]

पेराक्लीज कालीन विज्ञान एवं साहित्य की उपलब्धिया

पेराक्लीज कालीन विज्ञान एवं साहित्य की उपलब्धिया 1. चिकित्सा शास्त्र -पेरिक्लीज-काल के यूनानियों में चिकित्सा-शास्त्र में सर्वाधिक प्रगति की। 425 ई.पू. में एकरागास के एम्पिडोक्लीज से इस शास्त्र का इतिहास प्रारम्भ होता है। उसने यह प्रमाणित किया कि त्वचा के सूक्ष्म छिद्र श्वास प्रक्रिया में पूरक होते हैं तथा रक्त हृदय से उसकी ओर प्रवाहित […]

होमरकालीन यूनान के आर्थिक जीवन, धर्म, दर्शन एवं सांस्कृतिक जीवन

होमरकालीन यूनान के आर्थिक जीवन, धर्म, दर्शन एवं सांस्कृतिक जीवन   आर्थिक जीवन : होमर कालीन आर्थिक व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –  1. कृषि व पशुपालन -होमर युग में समाज के आर्थिक जीवन का आधार कृषि थी। कृषि भूमि राजा के अधीन होती थी। वह स्वेच्छा से इसे केवल जोतने बोने के लिए […]

होमर युगीन सभ्यता पर निबन्ध

होमर युगीन सभ्यता पर निबन्ध  1. समाज का संगठन-होमर के काव्यों में उन संस्थाओं व संगठनों का प्रारम्भिक चित्रण मिलता है जिन्हें आगे चलकर चूनानियों, रोमनों व जर्मनों ने प्रहण किया, अर्थात् शासनाध्यक्ष राजा परामर्थ के लिये समुदाय के प्रमुखजनों की परिषद बूले (Boule) व जनसभा अगोरा (Agora) थी। परन्तु प्राचीन काल में जिसका होमर […]

पारसीक समाज की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन

पारसीक समाज की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन  सामाजिक संगठन -प्राचीन पारसीक समाज चार वर्गा में विभाजित था। प्रथम वर्ग के अन्तर्गत शासक तथा उसके कुल के सदस्यों की गणना की जाती थी। इनका स्थान सर्वोत्कृष्ट था। द्वितीय वर्ग में वंशानुगत भू-स्वामी तथा पदाधिकारी आते थे। तृतीय वर्ग पुरोहितों का था किन्तु समाज में इन्हें विशेष […]