वेश्यावृत्ति के प्रकार, विशेषता एवं दुष्प्रभाव

 वेश्यावृत्ति के प्रकार, विशेषता एवं दुष्प्रभाव 

वेश्यावृत्ति समाज की एक गम्भीर समस्या है। वेश्यावृत्ति सामाजिक विघटन का एक स्वरूप है तथा यह सामाजिक विघटन का कारण और परिणाम दोनों ही है, क्योंकि वेश्यावृत्ति सामाजिक विघटन के परिणामस्वरूप प्रारम्भ भी होती है और सामाजिक विघटन को जन्म भी देती हैं। यद्यपि एक सामाजिक बुराई के रूप में वेश्यावृत्ति अति प्राचीन काल से प्रचलित रही है, परन्तु इसे कभी भी सामाजिक मान्यता प्राप्त नहीं हुई हैं। मानसिक बिज्ञानो के शब्दकोष में जियोफ्रे ने लिखा है, “वेश्यावृत्ति विश्व का सबसे पुराना व्यवसाय है और यह तभी से चला आ रहा है जब से किसी समाज में लोगों की काम-भावनाओं को विवाह और परिवार, में सीमित किया गया है। वेश्यावृत्ति यौन-इच्छाओं की सन्तुष्टि का एक विकृत एवं घृणित तरीका है। इससे व्यक्ति का नैतिक पतन होता है।’ वेश्यावृत्ति के कारण एवं उनकी कार्यपद्धति के आधार पर वेश्याओं को निम्नांकित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है – 

1. साधारण वेश्याएँ – साधारण या सामान्य वेश्याओं से तात्पर्य उन वेश्याओं से जो नगर के वेश्यावृत्ति के लिए बदनाम् इलाकों (Red Light Areas) में स्थित वेश्यालयों (Brothels) में रहकर खुले आम वेश्यावृत्ति करती हैं। इस प्रकार की वेश्याएं पुरानी वेश्याओं या वेश्यालय चलाने वाले व्यक्तियों के संरक्षण या दबाव में कार्य करती हैं। इन वेश्याओं में नैतिकता नाम की कोई वस्तु नहीं होती हैं और ये वेश्यावृत्ति को एक सामान्य व्यवसाय के रूप में, लेती हैं। ये सामान्यतया निम्न एवं निम्न-मध्यम वर्ग के व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं, जिसके कारण इनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं होती है। 

2. कॉर्ल-गर्ल्स – इस प्रकार की वैश्याएँ, होटलीं, शराबघरों, नाचधरों इत्यादि में जाकर अपना धन्धा करती हैं। इस प्रकार की वेश्याएँ शिक्षित, फैशनेबिल एवं अन्य व्यवसायों, जैस-टेलीफोन ऑपरेटर, स्टेनो, ब्यूटिशियन इत्यादि में लगी होती हैं, जिस कारण इन्हें पहचानना सरल नहीं होता है। बड़े-बड़े शहरों में, अच्छे घरों की लड़कियाँ एवं स्वियो भी इस कार्य में लगी होती हैं। इन वेश्याओं के सम्पर्क होटल कर्मचारियों, टैक्सी चालकों एवं इस व्यवसाय के अन्य दलालों से होते हैं जो अपना कमीशन लेकर उन्हें ग्राहकों से मिलवाते हैं तथा इनके लिए ग्राहकों का प्रबन्ध करते हैं। ये वेश्याएं ग्राहको के बुलावे पर होटलों, फॉर्म-हाउसों एवं अन्य स्थानों पर जाती हैं, जिसके लिए अब पर्याप्त ऊँची कीमत वसूल करती हैं। ये वेश्याएं इस व्यवसाय को एक पूर्णकालिक व्यवसाय के रूप में न अपनाकर एक अंशकालीन या द्वैतीयक व्यवसाय के रूप में अपनाती हैं, ताकि इनकी आय में वृद्धि हो सके और ये अधिक ऐशोआराम की जिन्दगी व्यतीत कर सके। यह वेश्यावृत्ति का एक छिपा हुआ स्वरूप है। इस व्यवसाय में इन कॉल-गल्ल्स को अधिक सम्मानित वेश्याएँ माना जाता हैं। 

3. वंशानुगत वेश्याएँ – इस प्रकार की वेश्याएं किसी दबाव या जोर-जबरदस्ती द्वारा वेश्याएं नहीं बनायी जाती हैं, बल्कि ये वेश्याओं की सन्ताने होती हैं और वेश्यावृत्ति उनके लिए एक वंशानुगत व्यवसाय के समान होती हैं। वेश्याओं की सन्तान होने के कारण उनका पालन-पोषण और विकास उसी वातावरण में होता है और वे इस व्यवसाय की शिक्षा अपनी माताओं से प्राप्त करती हैं तथा बड़ी होने पर वह वेश्यावृत्ति द्वारा ही अपना ओर अपनी माता एवं परिवार के भरण-पोषण का प्रबन्ध करती है। 

4. धार्मिक वेश्याएँ – ऐसी वेश्याएँ जो धार्मिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं के कारण इस पेशे को अपनाती हैं, धार्मिक वेश्याएँ कही जाती है। भारत में प्राचीन काल से ही देवदासी प्रथा प्रचलिन रही है, जिसमें युवा लड़कियों को मन्दिर में देवताओं को अर्पित कर दिया जाता था। इनका विवाह प्रतीकात्मक रूप में ईश्वर के साथ कर दिया जाता था तथा इसके पश्चातू ये आजीवन मन्दिरों में ही गायन एवं नृत्य का कार्य करती थीं तथा रात्रि में उन्हें मन्दिर के महान्तों एवं पुजारियों के साथ यौन सम्बन्ध स्थापित करना पड़ता था। इन धार्मिक वेश्याओं को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन्हें दक्षिण में देवदासी, महाराष्ट्र में मुरली, कर्नाटक में बासी तथा मारवाड़ के क्षेत्र में भक्तिन कहा जाता है। चेन्नई, मुम्बई, कर्नाटक तथा आन्ध्र प्रदेश के वेश्यालयों में इस प्रकार की धार्मिक वेश्याओं की संख्या अधिक मिलती है। 

5. पिछड़ी व अपराधी जातियों की वेश्याएँ – भारत में अनेक पिछड़ी एवं अपराधी जनजातियों में वेश्यावृत्ति को बुरा नहीं माना जाता है, बल्कि परिवार के पुरुषों द्वारा ही परिवार की स्त्रियों से वेश्यावृत्ति करायी जाती है उत्तर प्रदेश की नट, बेड़िया तथा सांसी इसी प्रकार की अपराधी जनजातियाँ हैं जिनमें वेश्यावृत्ति को कोई अनैतिक कार्य न मानकर अर्थोपार्जन का एक सामान्य तरीका माना जाता है। 

वेश्यावृत्ति की विशेषताएँ – 

वेश्यावृत्ति की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं – 

1. देश्यावृत्ति में स्थापित होने वाले यौन सम्बन्ध अवैध होते हैं, यही कारण है कि इनमें किसी प्रकार का सामाजिक या वैधानिक अधिकार एवं दायित्व का कोई स्थान नहीं है। 

2. वेश्यावृत्ति मात्र यौन अनैतिकता नहीं है। वेश्यावृत्ति यौन अनैतिकता से इस अर्थ में भिन्न हैं कि इसमें व्यापक सम्बन्ध एवं आर्थिक लाभ का तत्व अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होता है। 

3. वेश्यावृत्ति का सम्पादन एक व्यवसाय के रूप में किया जाता है, चाहे वह पूर्णकालीन व्यवसाय हो या अंशकालीन व्यवसाय। इसका उद्देश्य जीवनयापन होता है। 

4. वेश्यावृत्ति एक भेदभाव रहित यौन सम्बन्ध है। इसमें जाति, धर्म, प्रजाति, क्षेत्र एवं ऊंच-नीच की भावना के बिना उन सभी लोगों के साथ यौन सम्बन्ध किया जाता है, जो इसके लिए पैसा देने को तैयार हों ।

5. वेश्यावृत्ति में यौन सम्बन्ध मात्र आर्थिक लाभ के लिए स्थापित किये जाते हैं उनमें किसी भी प्रकार के प्रेम या भावनात्मक लगाव का पूर्ण अभाव पाया जाता है। 

6. वेश्यावृत्ति में किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक संतुष्टि की अपेक्षा आर्थिक लाभ की भावना सर्वोपरि होती है। 

7. वेश्यावृत्ति वह व्यवसाय हैं, जिसमें वेश्या द्वारा अपने रूप, यौवन एवं शरीर को दूसरों बेचा जाता है। 

8. यद्यपि वेश्यावृत्ति का अर्थ स्त्री-वेश्या से ही लगाया जाता है, परन्तु पुरुषों में भी वेश्यावृत्ति पायी जाती है आधुनिक समाजों में पुरुष वेश्याओं की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। 

वेश्यावृत्ति के दुष्प्रभाव/परिणाम – 

वेश्यावृत्ति एक गम्भीर सामाजिक समस्या है और इसके परिणाम अत्यधिक व्यापक होते हैं। वेश्यावृत्ति के प्रमुख दुष्प्रभावों को निम्न रूप में स्पष्ट किया जा सकता है – 

1. वैयक्तिक विघटन -वेश्यावृत्ति में अवैध. यौन-सम्बन्ध बनाये जाते हैं। इन अवैध यौनसम्वन्धों के कारण व्यक्ति के चरित्र का पतन हो जाता है। वेश्या की सामाजिक प्रतिष्ठा गिर जाती है और उसका ‘आत्मक्षत’ जाता है। इससे वेश्याओं में हीन भावना उत्पन्न हो जाती है। इस कारण अनेक वेश्याएं नशीली वस्तुओं एवं शराब का सेवन करने लगती हैं। 

2. पारिवारिक विघटन -वेश्यावृत्ति पारिवारिक विघटन का कारण और परिणाम दोनों ही होती है। जब सी यौनिक दृष्टि से अपवित्र एवं अविश्वसनीय हो जाती है तो विवाह विच्छेद की समस्या उत्पन्न हो जाती है। दूसरी ओर वेश्यागमन करने वाले व्यक्ति जब अपनी सम्पत्ति वेश्यावृत्ति पर फूँकने लगते हैं तो परिवार आर्थिक अभावों में घिरने लगता है, जिससे उचित भरण-पोषण के अभाव में परिवार टूटने लगते हैं और परिवार नष्ट होने की स्थिति में पहुँच जाते हैं। 

3. सामाजिक विघटन – वेश्यावृत्ति वैयक्तिक एवं पारिवारिक विघटन के साथ ही सामाजिक विघटन को भी जन्म देती हैं। वेश्यावृत्ति के कारण सामाजिक मूल्यों का ह्ास होता है और वे टूटने लगते हैं। इसके कारण समाज में नियन्त्रण शिथिल हो जाता है और अपराधों में वृद्धि होती है। जिन देशों में वेश्यावृत्ति को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है, वहाँ यह राजनैतिक भ्रष्टाचार का महत्वपूर्ण कारण बन गयी है। इसे गैरकानूनी घोषित करने से यह समाप्त तो नहीं हुई है, बल्कि नये-नये रूपों में सामने आने लगी है। 

4. अपराधों में वृद्धि – वेश्यावृत्ति इस व्यवसाय से जुड़े ऐसे लोगों की एक बड़ी संख्या उत्पन्न कर देती है जो वेश्यावृत्ति के साथ ही जुआ, डकैती, अपहरण तथा चोरी आदि अपराधों से भी जुड़े हुए होते हैं। इस प्रकार वेश्यावृत्ति समाज में अपराधों की संख्य को भी बढ़ाती है। 

5. यौन-रोग – वेश्वावृत्ति के कारण स्त्री एवं पुरुष दोनों को ही यौन जनित रोग, जैसे-उपदंश और गोनोरिया आदि। भयंकर रोग लग जाते हैं। अब तो एड्स जैसी लाइलाज बीमारी भी वेश्यावृत्ति के कारण तेजी से फैल रही है। एक अनुमान के अनुसार 96 प्रतिशत वेश्याएँ किसी न किसी प्रकार के यौन रोग से पीड़ित होती हैं जो अपने ग्राहकों के माध्यम से इन रोगों को समाज के दूसरे हिस्सों विशेषकर ग्राहकों की पत्नियों तक पहुँचा देती हैं।

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