पारिवारिक विघटन का अर्थ एवं परिभाषा

पारिवारिक विघटन का अर्थ एवं परिभाषा

परिवार समाज का एक महत्वपूर्ण इकाई है इसी लिए पार्सन्स ने इसे हमारे वृहत् समाज की एक उप-व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया है। जिस प्रकार इस वृहत् समाज में प्रत्येक स्त्री, वृद्ध, युवा और प्रौढ़ सदस्य कुछ नियमों के अन्तर्गत सम्बन्धों की स्थापना करते हैं और अपनी अन्तःक्रिया के द्वारा एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, उसी प्रकार परिवार का संगठन भी सदस्यों के नियमबद्ध सम्बन्धों और अन्तक्रियाओं पर निर्भर होता है एक परिवार के सदस्यों के इन्हीं सम्बन्धी में जब तनाव उत्पन्न हो जाता है अथवा परिवार के आदर्श-नियमों का प्रभाव समाप्त होने लगता है, तब इसी दशा को हम पारिवारिक विघटन कहते हैं। वास्तव में, पारिवारिक विघटन और पारिवारिक संगठन तुलनात्मक शब्द है, इसलिए पारिवारिक विघटन के अर्थ और प्रकृति को समझने से पहले पारिवारिक संगठन की अवधारणा को समझना आवश्यक है। 

किसी भी समूह के संगठन के लिए उसके सदस्यों की मनोवृत्तियों और सामाजिक मूल्यों के बीच एकीकरण होना आवश्यक होता है। परिवार भी एक समूह है और इस नाते परिवार के सदस्यों में समान मनोवृत्तियों का होना तथा समान नियमों के द्वारा अपने व्यवहारों को नियन्त्रित करना एक आवश्यक दशा है परिवार में प्रत्येक सदस्य की एक विशेष प्रस्थिति होती है और उसी के अनुसार उससे कुछ विशेष भूमिकाओं को पूरा करने की आशा की जाती है। व्यक्ति की प्रस्थिति और भूमिका (status and role) मैं सामंजस्य होने से परिवार का सन्तुलन बना रहता है। संक्षेप में, इसी स्थिति को हम पारिवारिक संगठन कहते है। इसके अतिरिक्त, परिवार के सदस्यों में पारस्परिक त्याग की भावना, एक-दूसरे के विचारी को समझने की प्रवृत्ति, साधनों का समुचित उपयोग, आवश्यकतानुसार आर्य का वितरण नैतिकता में विश्वास तथा कर्ता के आदेशों का पालन कुछ अन्य विशेष आधार है जो एक परिवार को संगठित रखने में सहायक होते हैं। इलिएट और मैरिल के अनुसार परिवार के सदस्यों में उद्देश्यों की एकता, व्यक्तिगत हितों की तुलना में परिवार कल्याण को प्रधानता, सदस्यों की रुचियों में समानता तथा सदस्यों की भावनात्मक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि वे प्रमुख दशाएँ हैं जो परिवार को संगठित रखती है। परिवार में जब इन विशेषताओं का अभाव हो जाता है, तब सामान्य शब्दों में, इसी दशा को हम पारिवारिक विघटन कहते हैं। 

पारिवारिक विघटन का अर्थ एवं परिभाषा – पारिवारिक विघटन का तात्पर्य पारिवारिक अव्यवस्था से है, चाहे यह पारस्परिक निष्ठा और पारिवारिक नियन्त्रण की कमी से सम्बन्धित हो अथवा व्यक्तिवादिता की वृद्धि से इलिएट और मैरिल के शब्दों में कहा जा सकता है कि ‘पारिवारिक विघटन में हम किन्हीं भी उन बन्धनों की शिथिलता, असामंजस्य अथवा पृथक्करण को सम्मिलित करते हैं जो समूह के सदस्यों को एक-दूसरे से बाँधे रखते हैं। इस प्रकार पारिवारिक विघटन का अर्थ केवल पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा होना ही नहीं है बल्कि माता-पिता और बच्चों के सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न होना भी परिवार के लिए उतना ही अधिक घातक है। 

मॉरर के अनुसार, “पारिवारिक विघटन का अर्थ पारिवारिक सम्बन्धों में बाधा पड़ना है। अथवा यह संघर्षों की श्रृंखला का वह चरम रूप है जो परिवार की एकता के लिए खतरा पैदा कर देता है। ये संघर्ष किसी प्रकार के भी हो सकते हैं लेकिन संघर्षों की इसी श्रृंखला को पारिवारिक विघटन कहा जा सकता है।” इस कथन से स्पष्ट होता है कि पारिवारिक सम्बन्धों में सामान्य तनाव होना पारिवारिक विघटन नहीं है बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच पारस्परिक तनाव जब समय-समय पर अनेक संघर्ष उत्पन्न करते रहते हैं, तभी इस दशा को हम पारिवारिक विघटन कहते हैं। 

मार्टिन न्यूमेयर के शब्दों में, “पारिवारिक विघटन का अर्थ परिवार के सदस्यों में मतैक्य (consensus) और निष्ठा (loyalty) का समाप्त हो जाना अथवा बहुधा पहले के सम्बन्धों का टूट जाना, पारिवारिक चेतना की समाप्ति हो जाना अथवा पृथक्ता में विकास हो जाना है।” पारिवारिक विघटन का यह अर्थ विघटन की प्रकृति के कारणों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि परिवार में जिस चेतना और निष्ठा के आधार पर सदस्य एक-दूसरे से बंधे रहते हैं और असीमित दायित्व की भावना को महसूस करते हैं, उसी चेतना और निष्ठा का कम हो जाना अथवा इसमें कोई गम्भीर बाधा पड़ना ही पारिवारिक विघटन है। 

उपर्युक्त परिभाषाओं से कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश पड़ता है – 

(क) पारिवारिक विघटन का अर्थ परिवार में सदस्यों के सम्बन्धों का टूट जाना है;

(ख) पारिवारिक विघटन का सम्बन्ध केवल पति-पत्नी के सम्बन्ध में उत्पन्न तनाव से ही नहीं है;

(ग) सम्बन्धों का टूटना ही नहीं बल्कि परिवार के प्रति निष्ठा का भंग होना भी परिवार के संगठन के लिए उतना ही अधिक घातक है;

(घ) परिवार में आकस्मिक रूप से उत्पन्न होने वाला कोई विवाद अथवा तनाव पारिवारिक विघटन की दशा को स्पष्ट नहीं करता बल्कि दिन-प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले संघर्ष जब परिवार की स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर देते हैं, तभी हम इस दशा को पारिवारिक विघटन’ कहते हैं। 

वास्तविकता यह है कि पति-पत्नी के स्नेह-सम्बन्ध इतने आन्तरिक होते हैं कि परिवार को इन्हीं सम्बन्धों से सुरक्षा प्राप्त होती है इन बन्धनों में कोई भी शिथिलता आने पर अधिकांश अवसरों पर परिवार विघटित हो जाते हैं। बहुत-से व्यक्तियों का विचार है कि पारिवारिक विघटन का रूप पति या पत्नी द्वारा दूसरे को छोड़ देना, विवाह-विच्छेद पारस्परिक सहायता करने में असफलता तथा शारीरिक उत्पीड़न आदि के रूप में देखने को मिलता है। वास्तव में, ये दशाएँ स्वयं में महत्वपूर्ण जरूर हैं लेकिन परिवार को आवश्यक रूप से विघटित नहीं करती। ऐसे बहुत-से परिवार देखने को मिलेंगे जो आन्तरिक रूप से पूर्णतया विपरित है लेकिन उनमें बाहा रूप से ऐसी दशाएँ देखने को नहीं मिलती। बहुत-से पति-पत्नी एक-दूसरे से बिल्कुल असहमत होते हुए भी ठपर्युक्त दशाएँ इसलिए उत्पन्न नहीं होने देते क्योंकि उनके धार्मिक विश्वास (जैसा कि भारत में) उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं अथवा उनके आर्थिक स्वार्थ (जैसा कि पश्चिमी देशों में) उन्हें ऊपरी रूप से एक-दूसरे से बांधे रखते हैं। इस प्रकार पारिवारिक विघटन का अर्थ पारिवारिक बन्धनों की नियन्त्रण शक्ति में कमी आना तथा सदस्य के बीच मतैक्य का समाप्त हो जाना ही है।

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