आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष की समस्या

 आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष की समस्या

आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष की समस्या (Problem of Intra-Generation Conflict) – 

कार्ल मानहीन (Karl Mannheim) ने स्पष्ट किया है कि पीढ़ियों से सम्बन्धित समस्या एक विशेष समाजशास्त्रीय घटना है जिसका सम्बन्ध जन्म और मृत्यु के द्वारा समाज में नये समूहों के निर्माण और पुराने समूहों के निरसन (elimination) के रूप में देखने को मिलता है। अभी तक आयु को केवल एक जैविकीय तथ्य, मानकर ठसे समाजशास्त्रीय अध्ययन का विषय नहीं समझा जाता था। धीरे-धीरे जब समाजशास्त्रियों का ध्यान आयु के आधार पर बनने वाली पीढ़ियों और विभिन्न पीढ़ियों से सम्बन्धित सुंधर्षों की और जाना शुरू हुआ तो इसे सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक तनावों के एक प्रमुख आधार के रूप में देखा जाने लगा। 

आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष समाजशास्त्रीय रूप से एक विवादपूर्ण विषय रहा है साधारणतया यह माना जाता है कि जिन व्यक्तियों से एक पीढ़ी की रचना होती है, उनकी आयु. लगभग समान होने के कारण उनके विचारों, मनोवृत्तियों, मूल्यों और व्यवहारों में किसी तरह का अन्तर नहीं होता। इस कारण एक ही पीढ़ी के सदस्यों के बीच सामाजिक संघर्ष इतने गम्भीर नहीं होते कि उन्हें एक समस्या के रूप में देखा जाय। दसरी ओर, अनेक समाजशास्त्रियों ने पारिवारिक जीवन से सम्बन्धित समस्याओं के अध्ययन में आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष की भी एक प्रमुख समस्या के रूप में स्पष्ट किया है। उनका मानना है कि उदाहरण के लिए, विवाह के समय- वर और वधू-पक्ष के माता-पिता एक ही पीढ़ी से सम्बन्धित होने के बाद भी भिन्न मूल्यों और मनोवृत्तियों से प्रभावित होते हैं जिसके कारण दहेज से सम्बन्धित समस्याएं पैदा होती हैं। इसी तरह घरेलू हिंसा का सम्बन्ध भी आन्तरिक पीढी संघर्ष से ही सम्बन्धित हैं। यदि समान पीढ़ी के लोग विभिन्न आर्थिक वर्गों, भिन्न-भिन्न व्यवसायों, एक-दूसरे से भिन्न संस्कृतियों और भिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि से सम्बन्धित होते हैं तो उनके बीच भी सामाजिक सम्बन्धों में एक स्पष्ट अन्तर और अक्सर संघर्ष देखने को मिलता है। इसी दशा को हम आन्तरिक पीढी संघर्ष कहते हैं। 

आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष की अवधारणा को समझने के लिए संघर्ष के अर्थ को समझना भी आवश्यक है। संघर्ष को परिभाषित करते हुए ग्रीन (Green) ने लिखा है, ‘संघर्ष किसी दूसरे व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की इच्छाओं का जान-बूझकर विरोध करने, उन्हें दबाने या उत्पीड़ित करने के लिए किया जाने बाला प्रयत्न है।’ मैकाइवर तथा पेज (Maclver and Page) ने भी लगभग इसी रूप में संघर्ष को परिभाषित करते हुए लिखा है, संघर्ष में उन सभी गतिविधियों का समावेश होता है जिनके द्वारा व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक-दूसरे का विरोध करते हैं । इससे कुछ भिन्न, गिलिन और गिलिन (Gillin and Gillin) ने हिंसा अथवा हिंसा की धमकी को संघर्ष का प्रमुख तत्व माना है। एक अवधारणा के रूप में संघर्ष की प्रकृति प्रत्यक्ष भी हो सकती हैं और अप्रत्यक्ष भी परिवार में स्त्रियों के साथ हिंसक व्यवहार करना अथवा पति या सास द्वारा वहू को प्रताड़ित करना प्रत्यक्ष संघर्ष का उदाहरण हैं, जबकि एक पक्ष द्वारा किसी दूसरे पक्ष पर बलपूर्वक अपने निर्णय को लादना या दूसरे पक्ष को अपनी इच्छा के अनुसार व्यवहार करने के लिए बाध्य करना अप्रत्यक्ष संघर्ष है। स्पष्ट है कि जब यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्षे संघर्ष एक ही पीढी से सम्बन्धित लोगों की बीच बढ़ने लगता है, तब हम इसे आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष के नाम से सम्बोधित करते हैं। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि आन्तरिक पीढ़ी संघर्ष एक सार्वभौमिक घटना है क्योंकि किसी न किसी रूप में यह प्रत्येक समाज में पाया जाता है।

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