अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष के कारण

अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष के कारण 

अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष – अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष से तात्पर्य दो अनुक्रमिक पीढ़ियों में पाया जाने वाला ऐसा मतभेद है जो संघर्ष या टकराव की स्थिति उत्पन्न कर देता है। किसी कालेज में नकल को लेकर छात्रों एवं अध्यापकों में पाया जाने वाला टकराव इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं। यदि छात्र तो नकल करना चाहते हैं, परन्तु अध्यापक उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए अडिग है तो यह जिस प्रकार के टकराव एवं संघर्ष को जन्म देगा उसे अन्तर-पीढ़ी-संघर्ष’ कहा जाएगा। इसी प्रकार, किसी परिवार में यदि बच्चों एवं उनके माता पिता में प्रेम विवाह’ को लेकर टकराव है, तो यह भी ‘अन्तर-पीढ़ी संघर्ष का ही उदाहरण माना जाएगा। इलियट एवं मैरिल (Eliott and Merrill) के शब्दों में, प्रत्येक पीढ़ी यह विश्वास करती है कि उसके उत्तराधिकारी सीधे पतन के गर्त में जा रहे हैं। वे यह भूल जाते हैं कि वे भी अपने बड़ों की भयावह चिन्ता के विषय रहे हैं और जो भी परिवर्तन लाने में वे साधन बने हैं, आवश्यक रूप से विनाशकारी सिद्ध नहीं हुए हैं। विभिन्न पीढ़ियों में पाया जाने वाला यह संघर्ष आज युवा अतिसक्रियता एवं असन्तोष का प्रमुख कारण मानी जातয है। कारण-अन्तर-पीढ़ी संघर्ष के प्रमुख कारण निम्नलिखित है- 

(1) पश्चिमी संस्कृति – पश्चिमी संस्कृति को भी अन्तर-पीढ़ी संघर्ष के स्रोत के रूप में देखा गया है। स्वयं पश्चिमी देशों में तो अन्तर पीढ़ी संघर्ष पाया ही जाता है, परन्तु जो देश पश्चिमीकरण की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पश्चिमी संस्कृति के आदर्शों एवं मूल्यों को अपनाते है उनमें भी यह समस्या प्रसारित हो जाती है। पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव सर्वाधिक युवा पीढ़ी पर पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप युवा पीढ़ी अपने आपको अधिक आधुनिक मानने लगती है। जबकि पुरानी पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होने के कारण पुरातन व्यवस्था को बनाए रखना चाहती है। दोनों पीढ़ियों में पाया जाने वाला यह द्वन्द्व अन्ततः अन्तर-पीढ़ी संघर्ष का कारण बन जाता है। 

(2) मानदण्डों (आदर्शो) एवं मूल्यों में संघर्ष -परिवर्तन की प्रक्रियाएँ समाज के पुरातन एवं नवीन आदर्शों एवं मूल्यों में संघर्ष की स्थिति पैदा कर देती हैं। इससे वैयक्तिक, पारिवारिक, सामुदायिक तथा सामाजिक विघटन को प्रोत्साहन मिलता है। क्योंकि अन्तरपीढ़ी संघर्ष परिवार से प्रारम्भ होता है, इसलिए आदर्शों एवं मूल्यों में पाया जाने वाला संघर्ष भी इस समस्या के लिए उत्तरदायी है। आदर्शों एवं मूल्यों में पाया जाने वाला यह संघर्ष सम्पत्ति, विवाह अथवा पेशे से सम्बन्धित हो सकता है। 

(3) पारस्परिक विश्वास की कमी – जब विभिन्न पीढ़ियों में पाया जाने वाला विश्वास कम होने लगता है तो अन्तर-पीढ़ी संघर्ष विकसित हो जाता है। पुरानी पीढ़ी यह मानती है कि नई पीढ़ी अपने उत्तर्दायित्व में उनसे कहीं पीछे है इसके विपरीत, नई पीढ़ी के लोग पुरानी पीढ़ी के लोगों को आउट ऑफ डेट’, पुराने फैशन के तथा दकियानूसी विचारों को मानते हैं। वे समझते हैं कि हमें हर बात पर रोंका-टोका जाना इन्हीं दकियानूसी विचारों का परिणाम है। यह अविश्वास की स्थिति अन्तर-पीढ़ी संघर्ष को जन्म देती है। 

(4) नगरीकरण एवं औद्योगीकरण – नगरीकरण एवं औद्योगीकरण ऐसी जुड़वां प्रक्रियाएं हैं जो किसी भी समाज में वहुआयामी परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी हैं। इनसे पारिवारिक, सामुदायिक तथा सामाजिक संरचना इतना अधिक प्रभावित होती है कि परम्परागत मूल्यों को बनाए रखना कठिन हो जाता है। इन प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों से नवीन पीढ़ी तो शीघ्रता से प्रभावित हो जाती हैं, परन्तु पुरानी पीढ़ी पर इनके द्वारा जनित परिवर्तन का अधिक प्रभाव नहीं पड़ती है। मूल्यों में परिवर्तन अन्तर-पीढ़ी संघर्ष को विकसित करता है। 

(5) पीढ़ियों में शिक्षा की दृष्टि से अन्तराल – अन्तर-पीढ़ी संघर्ष उन परिवारों अथवा समुदाों में अधिक पाया जाता है जिनमें दो पीढ़ियों में शिक्षा की दृष्टि से काफी अधिक अन्तर पाया जाता है। नवीन पीढ़ी शिक्षा के परिणामस्वरूप अपने दृष्टिकोण में अधिक आधुनिक, तार्किक व वैज्ञानिक बन जाती है, जबकि पुरानी पीढ़ी परम्परावादी व्यवस्था से बाहर नहीं निकल पाती है। नई पीढ़ी के लोग सोचते हैं कि पढ़े-लिखे होने के कारण वे पुरानी पीढ़ी के लोगों से अधिक जानकारी रखते हैं। यह बात पुरानी पीढ़ी के लोग मानने को तैयार नहीं है। वे साचते हैं कि जितना अनुभव उनके पास है उतना शिक्षा नई पीढ़ी को नहीं दे पाती। इस प्रकार, दोनों पीढ़ियों के सदस्यों के दृष्टिकोण में पाया जाने वाला परस्पर विरोध अन्तर-पीढ़ी संघर्ष को जन्म देता है। 

( 6 ) सामाजिक संरचना में तीव्र परिवर्तन – अन्तर-पीढ़ी संघर्ष का प्रमुख कारण आधुनिक युग में सामाजिक संरचना में होने वाला तीव्र परिवर्तन है। इस तीव्र परिवर्तन के परिणामस्वरूप युवा पीढ़ी तो अपने मूल्यों को सरलता से बदल लेती है, जबकि पुरानी पीढ़ी अपने मूल्यों को नहीं छोड़ पाती। इससे दोनों पीढ़ियों में पाए जाने वाले मूल्यों में अन्तर होने लगता है तथा इनमें अन्तराल बढ़ता जाता है । यह अन्ततः अन्तर-पीढ़ी संघर्ष को जन्म दता है। किंग्स्ले डेविस ने सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तन को अमेरिकी समाज में अन्तर-पीढी संघर्ष का प्रमुख कारण माना है। इनका कहना है कि अत्यधिक तीव्र सामाजिक परिवर्तन युवाओं एवं उनके माता-पिताओं में संघर्ष को बढ़ावा देता हैं। इसी के परिणामस्वरूप अनेक युवाओं ने अपने परिवारों से विद्रोह कर दिया है। 

(7) पारिवारिक संरचना में परिवर्तन एवं विघटन -आधुनिक युग में औद्योगीकरण, नगरीकरण, पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण इत्यादि परिवर्तन की प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप संयुक्त परिवार की संरचना में भी अनेक परिवर्तन हो रहे हैं। इन परिवर्तनों में संयुक्त परिवार में कर्ता की सर्वोच्च स्थिति को झकझोर, कर रख दिया है। नवीन पीढ़ी कर्ता की निरंकुश सत्ता में नहीं रहना चाहती। इसलिए नवीन पीढ़ी के लोग कर्ता के आदेशों एवं निर्णयों को नहीं मानते हैं इससे केवल कर्ता को भावनाओं को ही ठेंस नहीं पहुँचती अपितु इससे अन्तर पीढ़ी संघर्ष को भी प्रोत्साहन मिलता है। अमेरिका तथा पश्चिमी समाजों में भी माता-पिता की सत्ता में ह्रास अन्तर-पीढ़ी संघर्ष का प्रमुख कारण रहा है। 

(8) दोषपूर्ण समाजीकरण – दोषपूर्ण समाजीकरण को भी अन्तर-पीढ़ी संघर्ष का एक कारण माना गया है। कई बार माता-पिता नौकरी करने के कारण अथवा अन्य किसी कारणवश अपने बच्चों का समाजीकरण ठीक प्रकार से नहीं कर पाते हैं। वे अपने बच्चों के कार्यों पर उस प्रकार का नियन्त्रण नहीं रख पाते जिस प्रकार का नियन्त्रण उन्हें उचित मार्गदर्शन हेतु अनिवार्य होता है। ऐसी स्थिति में बच्चे मां-बाप के नियन्त्रण से दूर होते जाते हैं, उनके एवं माँ-बाप के मूल्यों में परस्पर विरोध विकसित होने लगता है तथा वे एक-दूसरे से अलग दृष्टिकोण अपनाने लगते हैं इससे अन्तर-पीढ़ी संघर्ष में बृद्धि होती है। 

अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष को दूर करने के उपाय – अन्तर्पीढ़ीय संघर्ष को पूरी तरह से समाप्त तो नहीं किया जा सकता परन्तु कुछ प्रयासों से इसे बहुत कम अवश्य किया जा सकता है। इसके लिए निम्न उपाय किये जाने चाहिए। 

(1) संयुक्त परिवार में सत्ता का संचालन मिल जुलकर हो जिससे पारिवारिक सहयोग को प्रोत्साहन मिले। 

(2) पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी से उदारता एवं सामंजस्यता रखनी चाहिए।

(3) पुरानी पीढ़ी के लोगों का समाजीकरण इस प्रकार से किया जाना चाहिए जिससे उनमें नवीन विचारों को अपनाने के साथ-साथ पुरानी मान्यताओं के प्रति भी आस्था हो।

(4) समाज और सामाजिक जीवन के प्रायः समस्त क्षेत्रों में पुरानी तथा नई पीढ़ी को एक दूसरे के विचारों, भावनाओं और आदर्शों का सम्मान करना चाहिए। 

(5) नवीन आदर्श मूल्यों और आदर्श नियमों को प्राचीन पीढ़ी के सहयोग से नई पीढ़ी में समाहित किया जाना चाहिए।

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