अमेरिकी संविधान की प्रमुख विशेषता

अमेरिकी संविधान की प्रमुख विशेषता

संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय प्रणाली विश्व प्रसिद्ध है। विश्व के समस्त संविधानों में अमेरिका का संविधान सबसे प्राचीन एवं सर्वाधिक सफल संघीय संविधान माना जाता है। इसकी सफलता का प्रमाण यह है जब सन् 1787 में “अमेरिका का संयुक्त राज्य” नाम से इस संघ की स्थापना की गई तब इसमें मात्र 13 इकाईयाँ (राज्य) शामिल थे और वर्तमान समय में इसकी संख्या 50 हो गई है। जिस प्रकार इंग्लैण्ड संसदात्मक प्रणाली का जनक माना जाता है, ठीक उसी प्रकार अमेरिका संघात्मक प्रणाली का। अमेरिकी संघात्मक प्रणाली को अपना आदर्श मानते हुए विश्व के कई अन्य देशों में अपना संघात्मक संविधान का निर्माण करते समय उससे प्रेरणा ग्रहण की है जैसे- कनाडा, स्विटजरलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया आदि। संघात्मक शासन प्रणाली का अर्थ-संघात्मक शासन प्रणाली का तात्पर्य एक ऐसे शासन व्यवस्था से होता है जिसमें संविधान द्वारा ही संघीय सरकार एवं ईकाइयों की सरकारों के मध्य शक्तियों का वर्गीकरण कर दिया जाता है तथा शासन के तीनों अंगों-कार्यापालिका, व्यवस्थापिका तथा न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र पृथक-पृथक होते हैं तथा वे अपने क्षेत्र में पूर्ण स्वतन्त्र रहते हैं। 

अमेरिकी शासन प्रणाली की संघीय विशेषताएं -अमेरिकी शासन प्रणाली की संघीय विशेषताएँ अग्रलिखित है-

प्रमुख तत्त्व (1) राष्ट्रीय एकता तथा राज्यों के अधिकारों का सामंजस्य सन् 1787 के पूर्व अमेरिकी क्षेत्र में 13 उपनिवेशों का स्वतंत्र अस्तित्व था। एक लम्बे अरसे तक अलग-अलग रहते हुए उनमें अपनी पृथक सत्ता के प्रति स्वाभाविक मोह उत्पन्न हो गया था। अतः वे अपने पृथक अस्तित्व को समाप्त करने के लिये तैयार नहीं थे किन्तु साथ ही साथ, ब्रिटेन तथा यूरोप के अन्य देशों से उनकी स्वाधीनता को सतत् खतरा था। उसका मुकाबला करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एकता स्थापित करना नितान्त आवश्यक समझा। इन परिस्थितियों में उन्होंने 1787 में अमेरिका के संयुक्त राज्य के नाम से एक संघीय राज्य की स्थापना की जिसमें राष्ट्रीय एकता तथा राज्यों के अधिकारों का सामंजस्य करने का प्रयास किया गया है। इस संघ के बनने के बाद भी घटक राज्य अपना पृथक अस्तित्व बनाये हुये है। और वे अपने आन्तरिक मामलों में पूर्णतः स्वतन्त्र है, किन्तु राष्ट्रीय स्तर पर उनमें एकता स्थापित है। इस प्रकार अमेरिका में संघ निर्माण का पहला तत्त्व विद्यमान है।

(2) शक्तियों का वितरण-संघीय राज्यों में शक्तियों के वितरण की मुख्य दो विधियाँ हैं। प्रथम संविधान द्वारा केन्द्र को कुछ मिली हुई शक्तियाँ दी जाती है, और शेष सभी शक्तियाँ जिन्हें अवशिष्ट शक्तियाँ कहते हैं-इकाइयों को दी जाती है। इस प्रकार के शक्ति-वितरण का स्वाभाविक परिणाम यह होता है कि इकाइयों की पर्याप्त स्वायत्तता प्राप्त रहती है, वे शक्तिशाली होती है और उनकी तुलना में केन्द्र सशक्त रहता है। अतएव ऐसे संघ अशक्त केन्द्र वाले संघ कहलाते हैं।

इसके विपरीत, दूसरी विधि में इकाइयों की शक्तियों को सूचीबद्ध या निर्दिष्ट कर दिया जाता है और अवशिष्ट शक्तियाँ केन्द्र को प्रदान की जाती हैं इस शक्ति-विभाजन के अन्तर्गत इकाइयाँ अपेक्षाकृत शक्तिहीन रहती है और उनकी तुलना में केन्द्र सशक्त रहता है। ऐसे संघ संशक्त केन्द्र वाले संघ कहे जाते हैं। कनाडा का संघ एक ऐसा संघ है।

संघवाद के समर्थकों के अनुसार जिन संघों में पहली विधि अपनायी जाती है वहाँ हो वास्तविक संघीय शासन होता है संयुक्त राज्य अमेरिका में शक्ति-वितरण की यही विधि अपनायी गयी है। यहाँ अवशिष्ट शक्तियों इकाइयों में और निर्दिष्ट शक्तियाँ केन्द्र में निहित हैं। अतः सन् 1787 में में स्थापित अमरीकी संप सैद्धान्तिक रूप से एक सशक्त केन्द्र वाला संघ है। किन्तु अनेक कारणों से केन्द्र की शक्ति में पहले की अपेक्षा अत्यधिक वृद्धि हो गयी है। अन्य संघात्मक शासनों के समान अमेरिकी संविधान ने राष्ट्रीय महत्ता के विषय संघीय सरकार को और स्थानीय महत्व के विषय राज्यों की सरकारों को सौंपे हैं।

संघीय सरकार की शक्तियाँ-1. रक्षा, 2. सेना की स्थापना तथा उसकी घोषणा, 3. युद्ध तथा सन्धि की घोषणा, 4. वैदेशिक मामले व सम्बन्ध, 5. विदेशों के साथ व्यापार अन्तर्राज्यीय व्यापार, 7 करारोपण तपा कर-वसुली, 8. हाक और तार, 9. नाप और तौल, 10. मुद्रा का निर्माण, 11. संघीय कानूनों को बनाना और उन्हें लागू करना, इत्यादि।

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