मुगलकालीन भारत में महिलाओं की दशा

मुगलकालीन भारत में महिलाओं की दशा मुगलकालीन भारत एवं आज के भारत में बहुत कुछ साम्यता थी। यह पूर्ण सत्य है कि उस समय न तो रेलें थी एवं न ही पक्की सड़के। इसके अतिरिक्त और कोई बहुत बड़ी भिन्नता नहीं थीं। देहात बहुत अधिक थे एवं वन उस समय के बहुत घने थे। उस समय […]

मुगल काल में फारसी साहित्य के विकास

मुगल काल में फारसी साहित्य के विकास  मध्यकाल में मुगल सम्राट साहित्य के संरक्षक थे और इसकी विविध शाखाओं के विकास को उन्होंने खूब प्रेरणा दी। सम्राट ही नहीं हुमायूँ की माता से लेकर औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा तक अन्तपुर की स्त्रियां भी कला और साहित्य की संरक्षिकाएँ थीं। वे सुन्दर वस्तुओं, उद्यानों, चित्रकारी के […]

मुगलों के अधीन चित्रकला के विकास उनकी विशेषता

मुगलों के अधीन चित्रकला के विकास उनकी विशेषता मुगलकालीन शासक चित्रकला का हृदय से स्वागत करते थे। यद्यपि कुरान में चित्रकला का निषेध किया गया है। 13वीं शताब्दी में चित्रकला का प्रारम्भ मंगोल विजेताओं ने फारस में किया था। यह चीनी कला का प्रान्तीय रूप था और इस पर भारतीय, बौद्ध, ईरानी, वैक्ट्रियाई और मंगोलियन […]

खिलजी एवं तुगलक शासकों के अधीन वास्तुकला के विकास

खिलजी एवं तुगलक शासकों के अधीन वास्तुकला के विकास  सल्तनत काल (1206-1526 ई०) में कला के क्षेत्र में वास्तुकला (स्थापत्य) का सर्वाधिक विकास हुआ। जिस समय तुकों ने भारत पर आक्रमण किया, उस समय मध्य एशिया में विभिन्न जातियाँ वास्तुकला की एक विशिष्ट शैली का विकास कर चुकी थीं। इस शैली का विकास स्थानीय कला शैलियों, […]

भारत में सूफीवाद प्रभाव और भूमिका

भारत में सूफीवाद प्रभाव और भूमिका सूफी मत की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विद्वानों में मृतभेद है। प्रसिद्ध इतिहासकार यूसुफ हुसैन का अभिमान है कि इसका जन्म इस्लाम से हुआ और इसमें बाहर के विचारों और रिवाजों का कोई प्रभाव नहीं हुआ। डॉ. आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव का विचार है कि सूफीवाद पर हिन्दू विचारों और रिवाजों का अत्यधिक […]

मध्यकालीन भारत में भक्ति आन्दोलन के मुख्य सिद्धान्त

मध्यकालीन भारत में भक्ति आन्दोलन के मुख्य सिद्धान्त  भक्ति आन्दोलन सामान्य परिचय मध्यकालीन भारत अर्थात् सल्तनत युग के सांस्कृतिक युग को जिन दो तत्वों ने विशेष रूप से प्रभावित किया, उनमें से प्रमुख है- भक्ति आन्दोलन और सूफी मत। इन दोनों आन्दोलनों ने समाज की आधार शिला (दिशा) को बदल दिया। प्राचीन युग में हिन्दुओं का […]

भारतीय संस्कृति पर इस्लाम संस्कृति का प्रभाव

भारतीय संस्कृति पर इस्लामिक संस्कृति का प्रभाव भारतीय संस्कृति पर जहाँ तक इस्लामी संस्कृति के प्रभाव का प्रश्न है कमोवेश दोनों संस्कृतियों पर एक दूसरे का प्रभाव अवश्य पड़ा। कुछ विद्वान् मानते हैं हिन्दू संस्कृति ने अपेक्षाकृत मुस्लिम संस्कृति को प्रभावित किया और अपनी गहरी छाप मुस्लिम संस्कृति पर लगायी। इसके विपरीत दूसरा मत यह है […]

शंकराचार्य के अद्वैतवाद तथा भारतीय समाज पर उसके प्रभाव

शंकराचार्य के अद्वैतवाद तथा भारतीय समाज पर उसके प्रभाव शंकराचार्य का दार्शनिक चिन्तन हिन्दू धर्म के अन्तर्गत चार प्रमुख ज्योतिर पीठों को स्थापित करने वाले शंकराचार्य का नाम अग्रणी है। आप का जन्म केरल प्रान्त के अलवर नदी (मालावार तट के उत्तरी किनारे पर स्थिति कलादि ग्राम में 788 ई० के लगभग हुआ। आप के पिता […]

चोल कालीन कला पर एक समीक्षात्मक टिप्पणी

चोल कालीन कला पर एक समीक्षात्मक टिप्पणी  चोल युगीन कला-दक्षिण भारतीय कला के अन्तर्गत चोलयुगीन कला अपने पूर्व युग की कला से भी बहुतआगे बढ़ गई थी। चोल वंशी महान् शासकों की विजय पताका दक्षिण भारत के एक बड़े भू-भाग में ही नहीं भारतीय सागर को द्वीपों पर भी फहरा रही थी। जहाँ तक चोलकालीन […]

इंग्लैण्ड में राजतंत्र जीवित रहने के कारण

इंग्लैण्ड में राजतंत्र जीवित रहने के कारण संसदीय शासन प्रणाली होने के कारण इंग्लैण्ड में जो संवैधानिक सत्य है,वह राजनीतिक असत्य है। अर्थात् इस शासन प्रणाली में सिद्धान्त एवं व्यवहार में भेद है। वह सबसे अधिक सम्राट अथवा साम्राज्ञी अधिकारों एवं उसकी स्थिति में पाया जाता है। संवैधानिक दृष्टि से वह राष्ट्राध्यक्ष के साथ-साथ शासनाध्यक्ष […]