यूरोप के फलोत्पादन का वर्णन

यूरोप के फलोत्पादन का वर्णन 

प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation)  प्राकृतिक वनस्पति का विकास मुख्यतः धरातल की प्रकृति, जलवायु तथा मिटर्टी पर निर्भर करता है। यूरोप को निम्नलिखित वनस्पति प्रदेशों में विभाजित किया जा सकता है टुंड्रा वनस्पति प्रदेश- इसका विस्तार नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड तथा उत्तरी रूस पर है। यहाँ वर्ष के अधिकांश भाग में हिमाच्छादन रहता है। बसन्त ऋतु में हिम पिघलने पर काई (माँस) तथा लाइकेन आदि सूषम वनस्पति उगती है। कम ठण्डे भागों में छोटे रंग-बिरंगी फूल, बर्च आदि उगते हैं। कोणधारी वन प्रदेश -इसका विस्तार नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड तथा उत्तरी रूस के दक्षिणी भागों पर है। इन वनों में पाइन, स्प्रूस, लार्च, बर्च तथा सिलवर फर प्रमुख किस्में हैं । इन वनों का आर्थिक महत्व बहुत है। इनकी कोमल लकड़ियाँ अनेक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। मिश्रित वन प्रदेश- कोणधारी वनों के दक्षिण में,फ्रांस से लेकर पूर्व में यूराल पर्वतों तक इस प्रदेश का विस्तार है। इनमें कोणधारी किस्मों के साथ फिल्म, एश, ओक, पोल्डर आदि चौड़ी पत्ती के वन भी मिश्रित होते हैं। इन वनों को साफ करके खेती का विस्तार किया गया है। चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती वन इनका विस्तार ब्रिटिश द्वीपों, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैण्ड, डेनमार्क, हंगरी, रोमानिया, बल्गेरिया आदि पर मिलता है। इनमें एश, ओक, पोपलार, एल्म, बीच आदि प्रमुख किस्में हैं। इन वनों का अत्यधिक शोषण किया गया है। स्टेपी घास प्रदेश कोणधारी वनों के दक्षिण में 45°-60° अक्षांशों के मध्य महाद्वीप के आन्तरिक भाग में स्टेपी घास प्रदेश का विस्तार मुख्यताः यूक्रेन, दक्षिणी रूस तथा बेलारूस पर है। इन घास प्रदेशों को साफ करके गेहूँ तथा अन्य खाद्यन्नों की कृषि तथा पशुपालन किया जाता है। भूमध्यसागरीय वन प्रदेश

इसका विस्तार भूमध्य सागर तटीय देशों पर मिलता है। इन वनों में ओक, पाइन, जैतून, कॉर्क आदि प्रमुख किस्में हैं। झाड़ियाँ तथा रसदार फलों के वृक्ष भी उगते हैं। यूरोप के भूमध्य सागर तटीय प्रदेशों के उद्यान कृषि के अन्तर्गत रसदार फल, अंजीर, जैतून सेब, हरी सब्जियाँ तथा अन्य फलदार वृक्षों को खेती होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *