दक्षिण पूर्वी एशिया में जनसंख्या वृद्धि के कारण

दक्षिण पूर्वी एशिया में जनसंख्या वृद्धि के कारण

दक्षिण-पूर्वी एशिया के सघन जनसंख्या वाला प्रदेश है जहाँ अधिकांश जनसंख्या समतल मैदानी भाग- नदी घाटियों तथा समुद्रतटीय भागों में संकेन्द्रित है। सन 2014 में इण्डोनेशिया की जनसंख्या 25.2 करोड़, वियतनाम की 9.7 करोड़, फिलीपीन्स की 10.0करोड़, थाईलैण्ड की 6.6 करोड़, म्यांमार की 5.4 करोड़, मलेशिया की 3.1करोड़, कम्बोडिया की 1.5 करोड़, लाओस की 0.7 करोड़ और सिंगापुर की 0.5 करोड़ है। इस प्रकार दक्षिण-पूर्व एशिया की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या इंडोनेशिया के अंतर्गत है। जनसंख्या का घनत्व सिंगापुर में 8034 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी0 है जहां सम्पूर्ण जनसंख्या नगरीय है। फिलीपीन्स (334), वियतनाम (273), थाईलैंड (129) और इण्डोनेशिया (129) में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति से अधिक है। कम्बोडिया (82), मलेशिया (91), म्यांमार (9) और लाओस (29) में जनसंख्या का घनत्व 100 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी0 से कम है। पश्चिम में भारतीय संस्कृति और उत्तर में चीनी-जापानी संस्कृतियों के मध्य स्थित दक्षिण- पूर्वी एशिया में मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ है जिसपर इन दोनों पड़ोसी संस्कृतियों का प्रभाव देखने को मिलता है। यह एक विलग सांस्कृतिक परिमंडल (Cultural realm) है जिसमें मंगोलाइड तथा काकेशाइड प्रजातियों तथा उनसे मिश्रित प्रजाति का बाहुल्य है। इन्डोनेशिया के विभिन्न द्वीपों पर नीग्रोइड प्रजातियों के भी लक्षण मिलते हैं। मलेशिया तथा उसकी समीपस्थ भूमि (इण्डोनेशिया) पर विकिसत संस्कृति को ‘मलय संस्कृति के नाम से जाना जाता है। यहाँ काकेशाइड और मंगोलाइड सम्पर्क समूह की प्रमुखता पायी जाती है।

दक्षिण-पूर्वी एशिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग भाषाएं प्रचलित हैं। भाषा की दृष्टि से भिन्नता होते हुए भी इनमें सांस्कृतिक भिन्नता कम मिलती है। द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व तक विभिन्न देश यूरोपीय उपनिवेश थे जिसके कारण यहाँ की भाषा पर यूरोपीय भाषाओं (फ्रांसीसी, अंग्रेजी आदि) का मिश्रण भी देखने को मिलता है। थाई और म्यांमार की मुख्य भाषा बर्मी है। मलेशिया में मलय, इण्डोनेशिया में बहासा (इण्डोनेशियाई), फिलीपीन्स में फिलीपाइनों, कम्बोडिया में खमेर और वियतनाम में वियतनामी भाषा प्रयुक्त होती है। लाओस की आधिकारिक भाषा अरबी है।

धर्म या धार्मिक विश्वास के दृष्टिकोण से दक्षिण-पूर्व एशिया में विविधता पायी जाती है जिसका मुख्य कारण इस क्षेत्र के लिए समय-समय पर आने वाले आगन्तुकों का समूहहा है। प्राचीन काल में पांचवी से आठवी शताब्दीयों के मध्य भारतीय प्रवासियों के द्वारा इन देशों में हिन्दू तथा बौद्ध धर्मों का प्रसार हआ। परवर्ती वर्षों में व्यापार के उद्देश्य से यहाँ बड़ी संख्या में अखव्यापारी आये जिनके द्वारा यहाँ इस्लाम धर्म तथा अरबी भाषा का प्रचार हुआ। वर्तमान समय में दक्षिण-पूर्व एशिया में इस्लाम तथा बौद्ध धर्म प्रमुख है जबकि हिन्दू धर्म को मानने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। दक्षिण-पूर्वी एशिया में भारतीय (हिन्दू एवं बौद्ध), चीनी, जापानी और मलय संस्कृतियों का मिश्रित स्वरूप पाया जाता है। इंडोनेशिया, मलेशिया और लाओस में इस्लामी (अरबी) संस्कृति का वर्चस्व है। इंडोनेशिया की 86 प्रतिशत और मलेशिया की 58 प्रतिशत जनसंख्या मुसलमान है। मलेशिया की जनसंख्या में प्रतिशत बौद्ध 12 प्रतिशत चीनी तथा 7 प्रतिशत हिन्दू हैं। फिलीपीन्स की लगभग 0 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई है थाईलैंड की लगभग 94 प्रतिशत और म्यांमार की लगभग 90 प्रतिशत और लाओस की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या बौद्ध धर्म की अनुयायी है। कम्बोडिया की लगभग आधी जनसंख्या बौद्ध धर्मावलम्बी है और बौद्ध धर्म कम्बोडिया का राजकीय धर्म भी है। इस प्रकार दक्षिण-पूर्वी एशिया के विभिन्न भागों में अलग अलग भाषा बोलने वाले और विभिन्न धर्मावलम्बी लोग पाये जाते हैं। सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर दक्षिण-पूर्वी एशिया निम्नलिखित उप प्रदेशों में विभक्त किया जा सकता है।
(1) बौद्ध क्षेत्र
इसके अन्तर्गत म्यांमार, थाईलैंड, कम्बोडिया और लाओस सम्मिलित हैं जहाँ बौद्ध धर्म के अनुयायियों की अधिकता है। (2) ताओ-बौद्ध क्षेत्र
उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम इसके अंग है यहाँ चीनी ताओवाद और बौद्ध धर्म दोनों का
महत्वपूर्ण स्थान है। (5) मुस्लिम क्षेत्र –
मलेशिया और इंडोनेशिया में इस्लाम धर्मावलम्बियों की प्रधानता है। (4) ईसाई क्षेत्र फिलीपींस द्वीप समूह ईसाई-बहुल क्षेत्र है। दक्षिण-पूर्वी एशिया के कुछ देशों जैसे सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपीन्स और इण्डोनेशिया में नगरीकरण अपेक्षाकृत अधिक हुआ है सिंगापुर की शत प्रतिशत जनसंख्या नगरीय है। मलेशिया की 71 प्रतिशत, फिलीपीन्स की 63 प्रतिशत और इण्डोनेशिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती है। थाईलैण्ड (47 प्रतिशत) की लगभग आधी जनसंख्या नगरीय है। वियतनाम (32 प्रतिशत), लाओस (34 प्रतिशत), म्यांमार (31 प्रतिशत) कम्बोडिया (20 प्रतिशत) अल्प नगरीकृत देश हैं सिंगापुर आधुनिक ढंग का नगर है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों के संयोग के साथ पश्चिमी संस्कृति की ही प्रमुखता पायी जाती है। दक्षिण-पूर्वी एशिया की लगभग 52 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती है किन्तु सिंगापुर के अतिरिक्त अन्य नगरों में आवासीय दशाएं उपयुक्त नहीं हैं । दक्षिण-पूर्वी एशिया के विभिन्न देशों में अन्य विकासशील एशियाई देशों के समान ही नगरीकरण हुआ है। यहाँ नगरीकरण में वृद्धि ग्रामीण जनसंख्या के नगरों की ओर पलायन (स्थानांतरण) की प्रतिफल है। ग्रामीण निर्धनता, बेरोजगारी, सविधाओं शिक्षा मनोरंजन आदि) के अभाव के कारण ग्रामीण जनसंख्या बडी संख्या में नगरों के लिए स्थानांतरित होती है जिससे नगर के आकार में वृद्धि होती जाती है और अनेक प्रकार की आवासीय तथा अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। नगरीय केन्द्रों पर अधिक जनसंख्या के संकेन्द्रण से अनियोजित बस्तियों, मलिन बस्तियों, झोपड़पट्टियों आदि का उदय होता है और नगरीय प्रदूषण, सामाजिक प्रदूषण, बेरोजगारी आदि की व्यापकता से नगरीय जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। इण्डोनेशिया में जकार्ता, बांडुंग, सराबाया, मैडन, सेमरंग, पलैम्बंग और जुंगपंडंग प्रमुख हैं। मलेशिया में कुआलालमपुर, थाईलैंड में बैंकॉक, फिलीपीन्स में मनीला, और सेबू, म्यामार कें यांगून (रंगून), वियतनाम में हो-ची-मिन नगर और हनोई तथा द्वीपीय नगर सिंगापुर दक्षिण-पूर्वी एशिया के अन्य महत्वपूर्ण नगर हैं। इनमें लगभग 15 लाख जनसंख्या वाला कुआलालमपुर (मलेशिया)सबसे बड़ा नगर है। इसके पश्चात जकार्ता, मनीला और बैंकाक का स्थान है।

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