एशिया का भौगोलिक महत्व

 एशिया का भौगोलिक महत्व 

. भौगोलिक विशेषताएँ (Geographical Charateristics) एशिया महाद्वीप एक विशिष्ट भौगोलिक भूखण्ड है, इसकी प्रमुख भौगोलिक विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं-

1. स्थित

अधिकांश महाद्वीप उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित हैं। यह तीनों कटिबन्धों (उष्ण, शीतोष्ण तथा शीत) में विस्तृत हैं। अधिकांश पूर्वी एशियाई देश समुद्र तटीय हैं, जो समुद्री जलवायु तथा समुद्री व्यापार से लाभान्वित होते हैं। एशिया की पश्चिमी सीमा पर भूमध्य सागर तथा लाल सागर स्थित है, जो शताब्दियों से एशिया के सांस्कृतिक स्वरूप स्वरूप को निर्धारित करते रहे हैं। डच, फ्रेंच, ब्रिटिश आदि साम्राज्यवादी शक्तियों ने समुद्री मार्गों द्वारा एशिया में अपने उपनिवेश स्थापित किये।

2. भूआकृतिक स्वरूप- 

एशिया में तीन प्रमुख संरचनात्मक विभाग-प्राचीन स्थलखण्ड, अल्पाइन वलित श्रेणियाँ तथा विवर्तनिक गर्त – स्थित हैं। यहाँ उच्चावच स्वरूपों में पर्वत श्रेणियाँ, आन्तरिक बेसिन, पठार एवं विस्तृत नदीय मैदान सम्मिलित हैं। धरातलीय विविधता ने इस महाद्वीप के जन-जीवन, आर्थिक एवं सांस्कृतिक तथा राजनीतिक स्वरूप को प्रभावित किया है।

3. जलवायु-

एशिया में विश्व की सभी प्रकार की जलवायु पाई जाती है, तथापि इसके अधिकांश भाग में मानसूनी जलवायु मिलती है। मानसूनी जलवायु में विभिन्न ऋतुओं की लयबद्धता, पवनों की दिशा का उत्क्रमण, वर्षा की अनिश्चितता, परिवर्तनशीलता तथा विषम वितरण प्रमुख विशेषताएँ हैं। पश्चिमी एशिया में मरुस्थलीय जलवायु की प्रधानता है, जबकि उत्तरी भाग में शीतल जलवायु मिलती है। उपर्युक्त तत्वों के अतिरिक्त मिटियाँ, वनस्पति तथा जल-राशियों की भी विविधताएँ मिलती हैं, जो इस महाद्वीप को सामूहिक रूप से प्रभावित करते हुए विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है।

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