रोमन धर्म की विवेचना

 रोमन धर्म की विवेचना  धर्म – रोम-साम्राज्य एक ऐसा विशाल भू-खण्ड था, जिसमें विविध भाषा-भाषी एवं नाना जातियों के लोग रहते थे। सामान्य विशेषता केवल एक ही थी-वह थी रोम के प्रति राज्यभक्ति। उल्लेखनीय बात यह है कि इतने विशाल साम्राज्य में राष्ट्र तथा जाति के प्रश्न को लेकर कोई भी झगड़ा नहीं था। अमुक […]

बेबीलोनिया समाज की विशिष्टता

बेबीलोनिया समाज की विशिष्टता  प्रारम्भिक बेबीलोनियन समाज अथवा प्राचीन बेबीलोनियन समाज की प्रमुख विशेषतायें निम्नवत थी-  (क) शहरी सभ्यता –बेबीलोनियन की सभ्यता शहरी सभ्यता थी। वहाँ का समाज तीन वर्गों में विभक्त थी पहला उच्च वर्ग था जिसे ‘आमेलू’ कहते थे। इस वर्ग में मंत्री, पदाधिकारी, सामन्त, राजवंश, पंजारी आदि सम्मिलित थे। दूसरा मध्यम वर्ग […]

कला के क्षेत्र में बेबीलोनिया के प्रमुख योगदान

 कला के क्षेत्र में बेबीलोनिया के प्रमुख योगदान बेबीलोनियानों में सृजनात्मक शक्ति का अभाव था, अतएव नवीन सृष्टियों को कौन कहे, सुमेरियन कला एवं स्थापत्य को भी वे जीवित न रख सके। इसी कारण उनकी कलात्मक उपलब्धियाँ नगण्य ही रही। वास्तुकला के क्षेत्र में बेबिलोनियनों के पिछड़े होने के दो कारण थे। सुमेरियनों की भांति […]

बेबीलोनिया की सामाजिक और आर्थिक दशा

बेबीलोनिया की सामाजिक और आर्थिक दशा  समाज-व्यवस्था – हम्मूराबी की विधि संहिता में समाज के तीन प्रधान वर्ग का उल्लेख -उच्चवर्ग (अविलुम), सामान्य जन (मुस्केनुम) और दास (वर्दुम)। उच्च वर्ग में राजकीय अधिकारी, पुरोहित, सैनिक और भूस्वामी सम्मिलित थे। ये लोग समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग थे और ऊँची हैसियत रखते थे। शेष लोग सामान्य जन-किसान […]

साहित्य के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान

 साहित्य के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान  बेबिलोनियन कीलाक्षर लिपि में लिखित साहित्य एक प्रकार से सुमेरियन साहित्य ही था पर इसके संकलन तथा संग्रथन में उन्होंने अपने परिवेश के अनुकूल उचित परिवर्तन कर मौलिकता लायी। इनकी साहित्यिक कृतियों के रूप में सर्वप्रथम गिल्गीमिश महाकाव्य (Gilgamesh Epic) का उल्लेख किया जा सकता है। इलियड (परसपक) […]

विज्ञान के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान

 विज्ञान के क्षेत्र में बेबिलोनियन के योगदान   बेबिलोनियनों ने विज्ञान में अच्छी प्रगति की थी। इस दिशा में गणित, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, मानचित्र-निर्माण एवं औषधिशास्र में इनकी उपलब्धियाँ महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इसमें कहीं-कहीं तो इन्होने सुमेरियनों को भी मात कर दिया था। यहाँ पुरोहितों को ही न्यायाधीश, प्रशासक, कृषि एवं उद्योग के संचालक, वैद्य […]

सुमेरियन सभ्यता का आर्थिक एवं सामाजिक जीवन

सुमेरियन सभ्यता का आर्थिक एवं सामाजिक जीवन   अर्थ व्यवस्था –सुमेर की सभ्यता का आधार कृषि-कार्य था। सुमेरियन श्रमिकों – ने दलदली भूमि को सुखाकर खेती योग्य बनाने में महारत हासिल की थी। कृषि के साथ पशुपालन का भी महत्व था। उनके पालतू पशुओं में गाय, भेड़, बकरी, सुअर, गधा, खच्चर और बैल उल्लेखनीय हैं। कृत्रि […]

सुमेरिया सभ्यता की धार्मिक स्थिति

सुमेरिया सभ्यता की धार्मिक स्थिति  धर्म और अनुष्ठान –सुमेर के प्राचीन निवासियों के दैनिक जीवन में आर्थिक कार्य-कलापों के अतिरिक्त धर्म का भी विशेष महत्व था बहुदेववादी सुमेर और अक्काद में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती थीं। किन्तु प्रत्येक नगर में एक प्रधान एवं विशिषट देवता था जिसे नगर का संरक्षक माना जाता था। […]

सुमेरियन वास्तुकला अथवा जिगुरत क्या है

 सुमेरियन वास्तुकला अथवा जिगुरत क्या है  वास्तुकला –सुमेरियन सभ्यता में लोग वास्तु कला से भी परिचित थे। यहाँ नरकलों को गाड़कर विभिन्न प्रकार की झोपड़ियां बनायी जाती थी। दीवारों के शीर्ष भाग गुम्बद के आकार का बना होता था। निरपुर से 5 हजार ई.पू. की मेहराबदार नाली मिली है। समाधियों और दरवाजों में मेहराब का […]

सुमेरियन सभ्यता के लेखन कला और साहित्य

 सुमेरियन सभ्यता के लेखन कला और साहित्य  लेखन कला विश्व सभ्यता के सम्पूर्ण इतिहास में सुमेर के निवासी, लेखन कला का आविष्कार करने वाले पहले लोग थे। मानव की स्मृति प्रमशील है अतः विवाद उत्पन्न होने पर स्थायी साक्षी की आवश्यकता पड़ी। धीरे-धीरे इन लोगों ने अनुभव किया कि मात्र किसी के कह देने से […]